Himanta Biswa Sarma ने मंत्री Biswajit Daimary का किया बचाव, ULFA बयान पर Congress ने उठाए सवाल

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने उल्फा की ‘प्रशंसा’ करने के मामले अपने मंत्रिमंडल सहयोगी विश्वजीत दैमारी का बचाव करते हुए दावा किया है कि मंत्री का आशय उल्फा के उस समूह से था जिसने सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। विश्वजीत दैमारी ने हाल ही में उग्रवादी संगठन उल्फा की यह कहते हुए प्रशंसा की थी कि उसने ‘‘पांच दशकों से अधिक समय तक राज्य को बाहरी ताकतों से बचाया।’’
शर्मा ने कहा कि शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद तकनीकी रूप से उल्फा अब प्रतिबंधित संगठन नहीं है। उन्होंने इसकी तुलना कट्टरपंथी परेश बरुआ के नेतृत्व वाले गुट से की, जिसने वार्ता प्रक्रिया से बाहर रहने के बाद अपना नाम बदलकर उल्फा (स्वतंत्र) रख लिया था।

वहीं, कांग्रेस की प्रदेश महिला इकाई की अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर गोस्वामी ने एक मंत्री द्वारा सशस्त्र संगठन की ‘तारीफ’ किए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या दैमारी की टिप्पणियां देश की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को दर्शाती हैं। एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दैमारी को 27 अक्टूबर को तिनसुकिया के काकोपाथर इलाके में मटक युवा छात्र सम्मेलन के केंद्रीय स्थापना दिवस समारोह में ये बयान देते हुए देखा गया।

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ने कहा कि हालांकि कुछ लोग उल्फा की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन ‘‘भूमिगत संगठन की वजह से ही कोई ताकत असम को अस्थिर नहीं कर सकी।’’
दैमारी को कहते सुना जा सकता है, ‘‘जिन लोगों ने उल्फा को उसका मूल नेतृत्व दिया, वे मोरान और मटक समुदायों से थे। यहां तक कि परेश बरुआ (उल्फा प्रमुख) भी मटक समुदाय से हैं।’’
बृहस्पतिवार को तिनसुकिया में एक सरकारी कार्यक्रम से इतर दैमारी के बयानों के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगी से इस बारे में बात की है, हालांकि उन्होंने खुद वीडियो नहीं देखा है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा, ‘‘मैंने उनसे (दैमारी) इस बारे में पूछा।

उन्होंने बताया कि उनका आशय उल्फा के उस गुट से था, जो शांति के रास्ते पर लौट आया है, न कि परेश बरुआ के गुट से।’’
शर्मा ने कहा, ‘‘हमने उल्फा के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और तकनीकी रूप से अब यह प्रतिबंधित नहीं है। उल्फा (आई) गुट अलग है।’’
अरविंद राजखोवा के नेतृत्व वाला उल्फा का वार्ता समर्थक गुट दिसंबर 2024 में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ शांति समझौते पर पहुंचा था। हालांकि, स्वयंभू कमांडर-इन-चीफ परेश बरुआ के नेतृत्व वाला चरमपंथी गुट अब भी उग्रवादी गतिविधियां जारी रखे हुए है।

इस बीच, गोस्वामी ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या दैमारी की टिप्पणियां राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के अनुरूप हैं। उन्होंने केंद्र से इस मामले में राज्य सरकार को भी अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहने का आग्रह किया। कांग्रेस नेता ने दैमरी से भी उनकी टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण मांगा।

उन्होंने अमित शाह से वायरल वीडियो और मंत्री के भाषण के पूरे संदर्भ की जांच करने तथा तथ्यों व कानून के आधार पर उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया। मीरा ने सवाल उठाया, “केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत उल्फा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है।

स्रोत: एजेंसियां / Asbabe Hindustan Agency Feeds

×

Instant Payment

असबाबे-हिंदुस्तान UPI QR

GPay / PhonePe / Paytm से QR कोड स्कैन करें