📅 रविवार, 08 नवंबर 2026 | असबाबे-हिंदुस्तान डिजिटल पोर्टल

Diwali Puja: लक्ष्मी पूजन में शामिल करें श्री यंत्र और पीली कौड़ियां समेत ये 5 चीजें

📅 प्रकाशित: November 8, 2026 | श्रेणी: ज्योतिष

दिवाली का पर्व रोशनी, खुशियों और उत्साह का पर्व है। इस दिन हर एक घर में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करके घर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के समय कुछ विशेष वस्तुओं को घर में रखना भी शुभ माना जाता है।

लक्ष्मी पूजन में श्री यंत्र, दक्षिणावर्ती शंख, पीली कौड़ियां, कछुआ और अष्टधातु ऐसी ही पांच चीजें है, जिन्हें धन, स्थिरता और सकारात्मकता से संबंधित देखा जा सकता है। आइए आपको बताते हैं इन वस्तुओं का धार्मिक महत्व और इन्हें दीपावली पर घर लाने की परंपरा के पीछे क्या मान्यता है।

श्री यंत्र: मां लक्ष्मी से जुड़ा पवित्र प्रतीक

हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी से संबंधित अत्यंत्र महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक माना जाता है। इसके बनावट में आपस में जुड़े त्रिभुजों और ज्यामितीय आकृतियों को संयोजन होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्री यंत्र की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। इसको पूजा स्थल पर स्थापित करें और नियमित रुप से इसकी आराधना करें।

दक्षिणावर्ती शंख: पूजा में विशेष महत्व

हिंदू धर्म में धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ के कार्यों में शंख का इस्तेमाल जरुर किया जाता है। इसमें दक्षिणावर्ती शंख को विशेष महत्व दिया गया है। वैसे इसकी बनावट शंख से अलग होती है और इसे मां लक्ष्मी से संबंधित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार,घर के पूजा स्थल पर दक्षिणावर्ती शंख रखने से शुभता और सकारात्मकता का संचार होता है। वैसे दिवाली पर इसकी स्थापना बेहद शुभ मानी जाती है।

पीली कौड़ियां

एक समय था, जब पीली कौड़ियों का इस्तेमाल लेन-देन के लिए किया जाता था। धीरे-धीरे इनका संबंध धन और समृद्धि से संबंधित है। धार्मिक मान्यताओं में पीली कौड़ियों को माता लक्ष्मी का प्रिय प्रतीक माना जाता है। दिवाली की पूजा में 11 या 21 पीली कैड़ियां रखें। माना जाता है कि इन्हें पूजा स्थल पर रखने से घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और धन की स्थिरता बनीं रहती है।

कछुआ

वास्तु शास्त्र के अनुसार, कछुए को धैर्य, स्थिरता और लंबी अवधि की सफलता से जोड़कर देखा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान कूर्म अवतार धारण किया था और अपनी पीठ पर मंदराचल पर्वत को सहारा दिया था। इसी कारण से कछुआ मजबूती और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। दीपावली पर धातु या क्रिस्टल से बना कछुआ घर लाने की प्रचलित परंपरा है।

अष्टधातु

असल में अष्टधातु का नाम आठ अलग-अलग धातुओं के मिश्रण से बना है। हिंदू धर्म में इसका विशेष स्थान माना जाता है। पूजा-पाठ में अष्टधातु से बनीं मूर्तियां और दूसरी धार्मिक वस्तुएं रखने की परंपरा रही है। माना जाता है कि आठ धातुओं का यह मेल संतुलन, शुभता और समृद्धि का प्रतीक है। इस बार दीपावली पर अष्टधातु से बनीं लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा घर लेकर आए।

स्रोत: एजेंसियां / Asbabe Hindustan Feeds

×

Instant Payment

असबाबे-हिंदुस्तान UPI QR

GPay / PhonePe / Paytm से QR कोड स्कैन करें