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Maya Rajeshwaran Revathi चेन्नई ओपन के क्वार्टर फाइनल में, सानिया के बाद बनीं पहली भारतीय

📅 प्रकाशित: November 5, 2026 | श्रेणी: खेल

… अमनप्रीत सिंह …
चेन्नई, पांच नवंबर भारत की युवा टेनिस खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि के महत्व से भलीभांति परिचित हैं लेकिन वह इस सफलता से उत्साहित होकर अपने लक्ष्य से भटकने के बजाय खेल पर ध्यान केंद्रित रखना चाहती हैं। सत्रह वर्षीय माया ने बुधवार को यहां चेन्नई ओपन में डब्ल्यूटीए टूर स्तर की एकल प्रतियोगिता के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर 2012 के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया। इससे पहले यह कारनामा दिग्गज सानिया मिर्जा ने किया था।

सानिया ने फरवरी 2012 में पटाया ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर यह उपलब्धि हासिल की थी। विश्व रैंकिंग में 669वें स्थान पर काबिज माया ने दूसरे दौर के मुकाबले में पोलैंड की क्वालीफायर खिलाड़ी वेरोनिका फाल्कोव्स्का (विश्व रैंकिंग 277) को सीधे सेटों में 6-4, 6-3 से शिकस्त दी। चेन्नई ओपन के पिछले दो सत्रों में कोई भी भारतीय खिलाड़ी दूसरे दौर से आगे नहीं बढ़ सकी थी।

ऐसे में माया की यह जीत और भी खास हो गई है। कम उम्र में अचानक सुर्खियों में आना किसी भी खिलाड़ी के लिए अवसर के साथ चुनौती भी लेकर आता है। ऐसी उपलब्धि के बाद मिलने वाली प्रशंसा जहां खिलाड़ी को आगे बढ़ने का हौसला देती है, वहीं उससे ध्यान भटकने का खतरा भी रहता है।

माया इसे खिलाड़ी के करियर का अहम हिस्सा मानती हैं। उनका मानना है कि भारतीय महिला टेनिस को नये आदर्शों की जरूरत है और ऐसे में खिलाड़ियों को मिलने वाली पहचान काफी मायने रखती है। क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के बाद माया ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह किसी भी खिलाड़ी के करियर का हिस्सा है।

कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें करना जरूरी होता है और मदद मिलना हमेशा अच्छा लगता है। पहचान मिलना भी सुखद होता है। भारत जैसे देश में किसी खिलाड़ी को पहचान मिलना निश्चित रूप से बहुत अच्छी बात है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ इसके लिए सब कुछ आपके खेल पर निर्भर करता है।

आप अच्छा प्रदर्शन करते हैं, उससे सीखते हैं और वही हासिल करते हैं जो आप चाहते हैं।’’
कोयंबतूर की इस युवा खिलाड़ी ने स्वीकार किया कि वह अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से दूर थीं। खासकर उनकी सर्विस उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। इसके अलावा प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी के आक्रामक रिटर्न ने भी उनकी मुश्किलें बढ़ाईं।

माया ने कहा, ‘‘जीत हासिल करके खुश हूं। मेरा प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। पिछले दौर में मेरा खेल इससे बेहतर था, लेकिन खुशी है कि मैंने जीत के रास्ते तलाश लिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘फाल्कोव्स्का काफी आक्रामक रिटर्न लगा रही थीं और हर गेंद पर दमदार प्रहार कर रही थीं।

इसलिए मैंने खुलकर खेलने, सही जगहों पर शॉट लगाने और अधिक से अधिक शॉट को अंक में बदलने की कोशिश की। माया की इस उपलब्धि के पीछे बदलावों से भरा एक पूरा सत्र रहा है। वह जूनियर टेनिस के साथ-साथ पेशेवर सर्किट में भी लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।

उन्होंने इस साल एक पेशेवर खिताब जीतने का लक्ष्य रखा था और नाइजीरिया के लागोस में आईटीएफ प्रतियोगिता जीतकर इसे हासिल भी कर लिया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस साल एक पेशेवर खिताब जीतना चाहती थी और इसकी शुरुआत लागोस से हुई। मुझे लगता है कि यह मेरे करियर की अच्छी शुरुआत रही।’’
माया का फिलहाल लक्ष्य अधिक से अधिक मुकाबले खेलना और साल का समापन अच्छे प्रदर्शन के साथ करना है।

वह रैंकिंग या बड़ी उपलब्धियों को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं लेना चाहतीं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे कुछ अल्पकालिक लक्ष्य जरूर हैं, लेकिन मैं उन्हें हासिल करने का दबाव नहीं लेना चाहती। आपको लगातार अपने खेल में सुधार करना है और उन पहलुओं पर काम करते रहना है जिनकी जरूरत है।

मेरा मानना है कि इसके बाद मुकाबले और जीत अपने आप मिलने लगेंगे।’’
जूनियर ग्रैंडस्लैम प्रतियोगिताओं में अपने सफर और वहां उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिलने के सवाल पर माया ने कहा, ‘‘आप मुकाबले खेलते हैं, हारते हैं और उनसे सीखते हैं। पुरानी बातों में उलझे रहने का कोई फायदा नहीं है।’’

स्रोत: एजेंसियां / Asbabe Hindustan Feeds

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